नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छठ पूजा के अवसर पर यमुना नदी की सफाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोपों की नई ऊँचाई पर पहुँच गया है। विपक्षी दल ने सत्ताधारी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘नकली यमुना’ बनाई गई है, जिसमें फ़िल्टर्ड पानी भरा गया है।
दावा: ‘पीएम के लिए आर्टिफिशियल घाट पर फ़िल्टर्ड पानी’
विपक्षी दल के वरिष्ठ नेता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह सनसनीखेज दावा किया। उनका आरोप है कि:
- ‘नकली यमुना’ का निर्माण: वासुदेव घाट पर मुख्य नदी के समानांतर एक अलग, कृत्रिम घाट का निर्माण किया गया है।
- फ़िल्टर्ड जल का उपयोग: उन्होंने दावा किया कि इस कृत्रिम कुंड को साफ़ रखने के लिए वज़ीराबाद जल शोधन संयंत्र की पाइपलाइन से फ़िल्टर्ड पेयजल भरा गया है, जो दिल्ली के लोगों को पीने के लिए सप्लाई किया जाता है।
- आरोप का सार: नेता ने कहा कि यह ‘फर्जीवाड़ा’ बिहार और पूर्वांचल के लोगों को यह दिखाने के लिए किया गया है कि यमुना साफ हो गई है, जबकि असली श्रद्धालु अभी भी मैली और जहरीली यमुना में छठ पूजा करने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह ‘छठ मैया की आस्था का मज़ाक’ है।
सत्ताधारी पार्टी का पलटवार: ‘राजनीतिक कुंठा’
इन आरोपों पर सत्ताधारी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया है।
- आरोपों को नकारा: पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने इन दावों को ‘राजनीतिक कुंठा का शर्मनाक मॉडल’ बताते हुए विपक्षी दल पर छठ पर्व को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।
- सफाई और व्यवस्था पर ज़ोर: उन्होंने कहा कि सरकार ने यमुना किनारे घाटों की साफ-सफाई सुनिश्चित की है और मुख्यमंत्री ने खुद यमुना को छठ पूजा के लिए तैयार करने का दावा किया है। झाग की समस्या को भी नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए हैं।
- श्रद्धालुओं की सुविधा प्राथमिकता: उन्होंने स्पष्ट किया कि घाटों पर लाइटिंग, सुरक्षा और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
कितनी है सच्चाई? (तथ्यों की पड़ताल)
यह विवाद तब गहराया जब वासुदेव घाट से जुड़े वीडियो सामने आए, जिसने विपक्षी दल के आरोपों को हवा दी:
| तथ्य | विवरण |
| वीडियो फुटेज | वासुदेव घाट के वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि यमुना नदी से अलग एक कृत्रिम कुंड (घाट) बनाया गया है। |
| पाइपलाइन का स्रोत | एक हरे रंग की मोटी पाइपलाइन WTP (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) से पानी लाती हुई दिख रही है। |
| विश्लेषण | इस पाइपलाइन की मौजूदगी और यमुना से अलग कुंड का निर्माण यह स्पष्ट करता है कि पानी का स्रोत सीधे प्रदूषित यमुना नहीं, बल्कि किसी ट्रीटमेंट प्लांट से आ रहा है। |
मूल प्रश्न और विवाद का केंद्र:
“अब सवाल ये है कि अगर यमुना साफ़ हो गई है, नहाने लायक हो गई है तो इस फ़िल्टर्ड पानी की क्या ज़रूरत थी?”
यह सवाल ही विवाद का केंद्र है। एक तरफ सरकार नदी की सफाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर अलग से फ़िल्टर्ड पानी की व्यवस्था करना यह संदेह पैदा करता है कि यमुना का पानी वास्तव में पूजा के लिए सुरक्षित स्तर तक साफ़ नहीं हुआ है।
- नदी की हकीकत: यमुना नदी का पानी अभी भी अत्यधिक प्रदूषित है (झाग और बैक्टीरिया की मात्रा तय मानकों से अधिक है)।
- सरकारी बचाव: सरकार इसे श्रद्धालुओं के लिए की गई बेहतर व्यवस्था का हिस्सा बता रही है, जबकि विपक्षी दल इसे ‘फ़र्ज़ीवाड़ा’ कहकर प्रचार का आरोप लगा रहा है।
फिलहाल, इस मामले पर राजनीतिक गतिरोध जारी है।
